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दिल्ली के रामलीला मैदान में SIR के खिलाफ विपक्ष की रैली: राहुल गांधी बोले, “गड़बड़ी करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी”

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चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ विपक्षी INDIA गठबंधन ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली की। इसका नाम “वोट बचाओ, देश बचाओ” रखा गया था। देश के कई राज्यों से आए हज़ारों कार्यकर्ता और समर्थक इसमें शामिल हुए। विपक्ष की मुख्य मांग थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। विपक्ष ने SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग भी की।

राहुल गांधी का हमला

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंच से चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त “वोट चोरी” में मदद कर रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार के बिना नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बन पाते।उन्होंने कहा कि कथित वोट चोरी के ज़िम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई होगी और “मोदी बच नहीं पाएंगे”।

रैली से पहले राहुल गांधी ने “चलो दिल्ली” का आह्वान किया था। सोशल मीडिया पर उन्होंने लोगों से कहा था कि वे पुलिस और लाठियों से न डरें।रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी दोपहर करीब 2:30 बजे अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव के साथ एक ही गाड़ी में रैली स्थल पहुंचे। मिंटो ब्रिज से रामलीला मैदान तक प्रस्तावित पैदल मार्च नहीं हो सका।

मंच पर विपक्ष के बड़े चेहरे

रैली में विपक्ष के कई बड़े नेता मौजूद थे। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, TMC प्रमुख ममता बनर्जी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला शामिल थे।

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि भाजपा ने केंद्र के साथ-साथ महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश में भी “वोट चोरी” से सत्ता हासिल की। उन्होंने जनता से मोदी सरकार को हटाने की अपील की।
  • तेजस्वी यादव ने इस लड़ाई की तुलना महाभारत से की। उन्होंने रामलीला मैदान को “लोकतंत्र बचाने की रणभूमि” बताया।
  • ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल के लोग SIR से पीड़ित हैं। उन्होंने इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया।
  • सचिन पायलट ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की।

प्रदर्शनकारी: कई राज्यों से पहुंचे लोग

आयोजकों को दिल्ली और दूसरे राज्यों से 40,000 से 50,000 लोगों के आने की उम्मीद थी। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भीड़ मैदान की सामान्य क्षमता से ज़्यादा थी। हालांकि भीड़ का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं हुआ है।

प्रदर्शनकारियों के हाथों में “वोट बचाओ, देश बचाओ” और “वोट चोरी बंद करो” जैसे नारों वाली तख्तियां थीं। मतदाता सूची के अलावा कई लोगों ने महंगाई, प्रदूषण और महिला सुरक्षा के मुद्दे भी उठाए।

सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था

दिल्ली पुलिस ने रैली को शर्तों के साथ अनुमति दी थी। एक शर्त यह थी कि कार्यक्रम शाम 5 बजे तक खत्म हो जाए। रैली स्थल और आसपास 4,000 से ज़्यादा पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात थे। मध्य दिल्ली में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ट्रैफिक पर पाबंदियां लगाई गईं।

भाजपा का पलटवार

भाजपा ने रैली को “राजनीतिक ड्रामा” बताया और दावा किया कि मैदान में “कुर्सियां खाली” थीं। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्षी नेताओं पर देश में अशांति फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया। इसी दिन भाजपा ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख विरोधी दंगों के मुद्दे पर अलग मार्च निकाला।

पृष्ठभूमि

यह रैली SIR को लेकर विपक्ष के लंबे विरोध की कड़ी है। इससे पहले 30 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने खड़गे के आवास पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक “जन महाभियोग” किया था। विपक्ष की मांगें हैं कि SIR प्रक्रिया पारदर्शी हो, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया जाए और पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया रद्द की जाए।

इस खबर के लिखे जाने तक रैली में लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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